भूखा राजा और गरीब किसान की कहानी | The Hungry King And Poor Farmer Story In Hindi

भूपेंद्र वर्मा ने सेंट थॉमस कॉलेज से बीजेएमसी और एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी से एमजेएमसी किया है। भूपेंद्र को हिंदी कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते करीब 3 वर्ष हो गए हैं। वैसे तो ये किसी भी विषय पर लिख स… more

The Hungry King And Poor Farmer Story In Hindi

सालों पहले एक नगर का राजा अपने राज्य में रात को अपना रूप बदलकर घूमता था। वो रूप बदलने के बाद लोगों से मिलकर अपने यानी राजा के बारे में जानने की कोशिश करता और उनकी समस्याओं को समझता था। एक रात जब वह नगर घूमकर आया, तो अचानक जोर से बारिश होने लगी। उसने देर किए बिना एक गरीब के घर का दरवाजा खटखटाया।

राजा के दरवाजा खटखटाने के बाद घर से एक व्यक्ति निकला। वह एक गरीब किसान था, जो अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। बारीश तेज थी, तो किसान ने राजा को अंदर आने के लिए कहा। राजा ने घर में जाने के बाद पूछा, ‘क्या आप मुझे कुछ खिला सकते हैंं। मुझे बहुत तेज भूख लगी है।’

वो गरीब किसान और उसका परिवार 3 दिनों से भूखा था और उसके घर में एक भी दाना अन्न का नहीं था। किसान के मन में हुआ कि भले ही हम भूखे हैं, लेकिन अपने अतिथि को यूं भूखा नहीं रख सकते। अब किसान ये सोच-सोचकर बेचैन हो गया कि अपने अतिथि का पेट कैसे भरा जाए, तभी उसने घर के सामने वाली दुकान से चावल चुराने की तरकीब सोची। उसने सिर्फ अतिथि के लिए ही दो मुट्ठी चावल लिया और उसे पकाकर राजा को खिला दिया। तब तक बारिश रुक गई थी और राजा अपने घर चला गया।

दूसरे दिन दुकान का मालिक अनाज की चोरी की शिकायत लेकर राजा के पास पहुंचा। राजा ने दुकान के मालिक और उस गरीब किसान को अपनी सभा में प्रस्तुत होने का आदेश दिया। सबसे पहले सभा में पहुंचे किसान ने राजा के सामने जाकर अपनी चोरी का इल्जाम कबूल कर लिया और बीती हुई रात की पूरी बात राजा को बता दी। किसान राजा से कहता है कि मैंने चोरी की, लेकिन मेरे परिवार ने उस अनाज का एक निवाला भी नहीं खाया।

गरीब किसान की बातें सुनकर राजा बहुत दुखी हुआ और उसने किसान को बताया कि अतिथि के रूप में मैं स्वयं तुम्हारे घर आया था। इसके बाद राजा ने सभा में पहुंचे दुकानदार से पूछा कि क्या आपने अपने पड़ोसी को चोरी करते हुए देखा था। दुकानदार ने जवाब दिया कि हां मैंने इसे रात में चोरी करते हुए देखा था।

दुकानदार की बात सुनने के बाद राजा कहता है कि इस चोरी के लिए मैं पहले जिम्मेदार हूं और फिर दूसरा तुम हो, क्योंकि तुमने अपने पड़ोसी को अनाज की चोरी करते हुए देखा। मगर कभी उसके भूखे परिवार को नहीं देखा। तुम अपने पड़ोसी होने का धर्म बिल्कुल निभा नहीं पाए। इतना कहने के बाद राजा ने दुकानदार को सभा से जाने के लिए कह दिया और किसान की अथिति निष्ठा भाव को देखकर उसे एक हजार सोने के सिक्के इनाम के रूप में दे दिया।

कहानी से सीख

अगर कोई आस पास रहने वाले मुसीबत में है, तो हमें उनकी मदद करनी चाहिए।

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